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शांगड़ गाँव के साथ जुड़े पांडवों के कुछ रोचक तथ्य

some interesting facts related to shangarh village with pandvas


यह कहानी उस समय की है जब शांगचुल महादेव किन्नर कैलाश पर्वत मे रहते थे तो उनकी भक्ति करने वहाँ बहूत से देवी देवता आते थे। जब पांडवों को तेरह वर्ष का वनवास मिला तो उस समय बे भी शांगचुल महादेव की भक्ति करने वहाँ चले गये। उस समय किन्नर कैलाश के नीचे सांगला नामक स्थान पर बहूत बड़ी झील थी। उसके चारों ओर कमल के फूल होते थे। जब शांगचुल महादेव और उनके भक्तों का आराम का समय होता था तो बे कमलों का मज़ा लेने के लिए झील के चारों तरफ घूमने आया करते थे। इस तरह वहाँ पर उनका समय बहूत आनंद के साथ गुज़रा। एक दिन शांगचुल महादेव की सभी देवी - देवताओं और पांडवों के साथ चर्चा हुई की हमने एक स्थान देवी - देवताओं के लिए बनाना है। वहाँ पर देवताओं के नित नियम के अनुसार कार्य होता रहे और वह स्थान देव शक्तियों से परिपूर्ण हो तथा देखने मे बह स्थान अती सुंदर हो।


फिर सब देवी देवताओं के प्रयत्न से शांगड़ स्थान को चुन लिया गया। तब शांगचुल महादेव ने पांडवों को आदेश दिया की वहाँ की आधी भूमि को छान लेना। उसमे कंकर पत्थर न हो। आधी भूमि को ऐसे ही रहने दें। उसके बाद आदेशानुसार पांडवों ने 130 बीघे ज़मीन छान ली और बाकी की ज़मीन रहने दी। तब शांगचुल महादेव ने छाना हुआ भाग गौ चारा रखा और उतना ही भाग ब्राह्मणो को दे दिया बाकी भूमि बाजा न बाज को दी। इस सारे स्थान का नाम देवधरा रखा गया। इस सारे परिसर को सुरक्षित बनाया गया।


उसके बाद यहाँ पर देवताओं के नियम ही चले। यहाँ पर कोई भी मनुष्य किसी दूसरों को न मार सकता है न गाली दे सकता है और न ऊँची आवाज़ मे बात कर सकता है। यहाँ तक की इस स्थान पर लामन और भाऊरू भ्जी नही बोल सकते। पाप यहाँ पर हो नही सकता। देवते के बोल हैं की इस मिट्टी पर कोई कर नही लगा सकता और यहाँ पर पेड़ों से डाली तक नही काटी जाती। जैसे छत्र के नीचे छाया होती है उसी प्रकार इस स्थान पर देवी देवताओं की कृपा होती है।


यहाँ पर ब्राह्मण नही थे इसलिए ब्राह्मणि को स्वप्न मे बताया की जब गाय दोपहर को आएगी वह एक स्थान पर दूध की धार छोड़ेगी उसी स्थान को खोद लेना। ब्राह्मणि ने वैसा ही किया फिर वहीं से पानी निकला और वह पानी भी दूध के रंग का था। और तभी से इसको बड़ा पवित्र माना जाता है। उस पानी से सभी बहुत देवताओं को पवित्र(गाडवा) किया जाता है। यह स्थान देऊघर(देवघर) के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा पूरे शांगड़ गाँव के स्थान पर पाप का कोई भी कार्य नही किया जाता है। ऐसा कहा जाता है की यहाँ के लोग जंगली जानवरों से बड़ी क्रूरता से व्यवहार करते थे। वोह लोग शंगचुल महादेव के रोकने से नही रुके तो महादेव ने उन्हे ख़त्म कर दिया और उनकी यादगार मे लोगों को सही रास्ते पर ले जाने के लिए एक लम्बा पत्थर इस छाने हुए मैदान मे गाड़ दिया। किसी को दुख ना दो। यह सारी बातें द्वापर युग् मे हुई। यह बातें कागजों मे नही थी।


जब राजा बुशैहर को राज तिलक किन्नौर के कामरू किला मे शंगचुल महादेव के सामने मिला क्योंकि शंगचुल महादेव राजा बुशैहर के कुल देवता है। तब राजा बुशैहर को स्वप्न हुआ की शांगड़ जाओ, जो वहाँ का नेगी राम चंद बोलेगा वैसा ही आपने वहाँ कर देना। राजा बुशैहर अपने ठाठ के साथ शांगड़ चल पड़े। वहाँ पर नेगी राम चंद को स्वप्न हुआ की जब राजा बुशैहर यहाँ पहुँचेंगे तो मैं साँप द्वारा चिन्ह दूँगा, फिर जो नियम देवघर के हैं वह कागजात मे चढ़ा देगा। जब राजा शांगड़ पहुँचे तो वहाँ पर एक बड़ा साँप निकला तो राजा और प्रजा वहाँ से भागने लगे तब नेगी ने कहा यह देवते का साँप है भागो मत, कुछ देर बात साँप अदृश्य हो गया और राजा ने सारी ज़मीन देवताओं के नाम की और 130 बीघे का छना हुआ भाग गौ चारा रखा। 130 बीघा ब्राह्मणो को दी और बाकी रीति- रिवाज के मुताबिक कागजात मे चढ़ाया। देवते ने भी राजा साहिब को थोड़ी सा स्थान दिया। वह अभी भी राजा के सिहांसन से विख्यात है। उसके नज़दीक आम लोग नही जाया करते है। यही परम्परा सदियों से चलती आ रही है।

इस स्थान की यात्रा की जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें


टिप्पणी

  • Sunil Kumar

    fjrigjwwe9r0TGE_HinBlogs_Comments:Disc
    Shangarh village is the most beautiful place on the earth. I visited this place in May 2018 and got spellbound by the natural beauty of this amazing place.

      15 Jun, 2018

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